खाकी पर दाग या मेहरबानी की इंतहा? सेट गवाह सिंडिकेट के मास्टरमाइंड को मिला साइबर सेल का इनाम!
जिस अधिकारी के कारनामों की गूंज ने पूरे देश में पुलिस महकमे को शर्मसार किया, जिसे सेट गवाहों के सिंडिकेट का जिन्न बाहर आने के बाद आनन-फानन में लाइन हाजिर किया गया था

खाकी पर दाग या मेहरबानी की इंतहा? सेट गवाह सिंडिकेट के मास्टरमाइंड को मिला साइबर सेल का इनाम!
मऊगंज जिले में न्याय और कानून की साख पर एक बार फिर गहरा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। जिस अधिकारी के कारनामों की गूंज ने पूरे देश में पुलिस महकमे को शर्मसार किया, जिसे सेट गवाहों के सिंडिकेट का जिन्न बाहर आने के बाद आनन-फानन में लाइन हाजिर किया गया था, उसे ही अब साइबर प्रभारी बनाकर उपकृत कर दिया गया है।हम बात कर रहे हैं नईगढ़ी थाने के पूर्व एसआई और थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर की। सूत्रों की मानें तो यह तो महज शुरुआत है, साहब को और भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से नवाजने की सेटिंग अंदरखाने चल रही है।
लाइन में हाजिरी कम, रीवा में बाजीगरी ज्यादा!
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जब से जगदीश सिंह ठाकुर को लाइन अटैच किया गया है, तब से साहब की मौजूदगी लाइन में कम और रीवा के गलियारों में ज्यादा देखी गई है। सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस विभाग के नियम-कायदे रसूखदार अधिकारियों के आगे बौने साबित हो रहे हैं?
सिंडिकेट के जरिए जिले की हुई थी किरकिरी
गौरतलब है कि नईगढ़ी थाना प्रभारी रहते हुए ठाकुर का नाम एक ऐसे सिंडिकेट से जुड़ा था, जो गवाहों को सेट कर पुलिसिया कार्रवाई को अपने हिसाब से मोड़ने का काम करता था। इस खुलासे के बाद मऊगंज पुलिस की देशव्यापी थू-थू हुई थी। उच्चाधिकारियों ने तब साख बचाने के लिए इन्हें लाइन भेजा था, लेकिन अब उन्हें साइबर सेल की कमान सौंपना दागी को इनाम देने जैसा नजर आ रहा है। आखिर जिस अधिकारी की वजह से जिले की पुलिसिंग पर सवाल उठे, उसे ही जिले की तकनीकी आंख (साइबर सेल) का जिम्मा क्यों? क्या मऊगंज पुलिस के पास योग्य और बेदाग अधिकारियों का अकाल पड़ गया है? क्या लाइन अटैच होने के बावजूद मुख्यालय से नदारद रहकर रीवा में समय बिताने वाले अधिकारी पर कार्रवाई के बजाय मेहरबानी क्यों?क्या आम आदमी को अब सिर्फ न्यायलय का ही सहारा लेना पड़ेगा?या जिन बेगुनाहों को इस सिंडिकेट के माध्यम से फसाया गया है उसके ऊपर भी कार्यवाही होगी ?




