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शिक्षा महाविद्यालय के परीक्षा प्रभारी की मनमानी ,शासकीय कालेज को बनाया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी

चहेतों को नकल कराने मनमानी तरीके से लगा रहा पर्यवेक्षकों की ड्यूटी,परीक्षा की गोपनीयता हुई तार तार

शिक्षा महाविद्यालय के परीक्षा प्रभारी की मनमानी ,शासकीय कालेज को बनाया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी

रीवा कमलेश तिवारी

 

चहेतों को नकल कराने मनमानी तरीके से लगा रहा पर्यवेक्षकों की ड्यूटी,परीक्षा की गोपनीयता हुई तार तार

शासकीय शिक्षा महाविद्यालय रीवा में पिछले 28 वर्षों से पदस्थ एक अपचारी प्राध्यापक की मनमानी के चलते यह महाविद्यालय शासकीय संस्था न होकर एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनकर रह गई है।यह प्राध्यापक कालेज को अपनी निजी जागीर समझ कर चलाता है।इसकी मनमानी का आलम।यह है कि प्राचार्य भी इसके आगे असहाय नजर आते हैं। महाविद्यालय में न तो नियम कानून चलते, न प्राचार्य के निर्देश,बल्कि इसी प्राध्यापक का हुकुम का सिक्का चलता है। यहां पदस्थ पूरा स्टाफ इसी प्राध्यापक की गुलामी करता है और प्राचार्य के निर्देशों को कोई भी तवज्जो नहीं देते

28 वर्षों से पदस्थ इस अपचारी प्राध्यापक की मनमानी का आलम यह है कि सतना जिले में पदस्थ एक शिक्षक को बिना किसी निर्देश के परीक्षा कार्यों में संलग्न कर रखा है। यदि किसी सक्षम अधिकारी का आदेश भी होगा तो वह नियम विरुद्ध है क्योंकि सतना जिले के जिस शिक्षक को इसने परीक्षा कार्यों में संलग्न कर रखा है, उसकी पत्नी सविता तिवारी एम एड की प्रशिक्षणार्थी है। यही शिक्षक परीक्षा के समस्त गोपनीय कार्य कर रहा है और उसकी पत्नी परीक्षार्थी है जिससे परीक्षा की संपूर्ण गोपनीयता तार तार हो रही है।
इतना ही नहीं परीक्षा प्रभारी प्राध्यापक अपने चहेतों को नकल की खुली छूट दे रखा है।यहां तक कि चहेतों को उपकृत करने के लिए चिन्हित शिक्षक संजीव तिवारी की ड्यूटी वीक्षकीय कार्य मे एक ही कक्ष पुराने हाल में प्रतिदिन लगाता है।अब तक एम एड प्रथम वर्ष के तीनों प्रश्न पत्रों में पुराने हाल में संजीव तिवारी की ड्यूटी ही वीक्षकीय कार्य में लगाई जा चुकी है।इसके अलावा परीक्षा प्रभारी प्राध्यापक की मनमानी का आलम यह है कि नव प्रवेशित प्रशिक्षणार्थियों से भी वीक्षकीय कार्य लिया जा रहा है।
कुल मिलाकर शिक्षा महाविद्यालय ,शासकीय महाविद्यालय न होकर पंकज प्राइवेट लिमिटेड बन कर रह गया है।सारे आदेश निर्देश मनमानी तरीके से यही लिखता है और प्राचार्य असहाय होकर हस्ताक्षर करने को मजबूर होते हैं।लोकायुक्त में जांच लंबित होने के बावजूद यह प्राध्यापक 28 वर्षों से चट्टान की तरह महाविद्यालय मे जमा हुआ है।लेकिन न तो प्रशासन न विभाग कोई भी जिम्मेदार इसकी मनमानी पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं।

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