Singrauli News: भूमिगत कोयला खदान के लिए मझौली में जनसुनवाई, ग्रामीणों ने दिया समर्थन; जल्द मिलेगी मंजूरी
इस परियोजना का संचालन 51 वर्षों तक किया जाएगा, जिसमें आधुनिक तकनीक से भूमिगत उत्खनन द्वारा प्रतिवर्ष 30 लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

Singrauli News: भूमिगत कोयला खदान के लिए मझौली में जनसुनवाई, ग्रामीणों ने दिया समर्थन; जल्द मिलेगी मंजूरी
इस परियोजना का संचालन 51 वर्षों तक किया जाएगा, जिसमें आधुनिक तकनीक से भूमिगत उत्खनन द्वारा प्रतिवर्ष 30 लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
विन्ध क्षेत्र के सिंगरौली जिले की बरगवां तहसील के मझौली गांव में प्रस्तावित गोंडबहेरा उज्जैनी ईस्ट भूमिगत कोयला खदान के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु आयोजित जनसुनवाई सफलता पूर्वक सम्पन्न हुई। इस अवसर पर प्रभावित होने वाले चार गांवों- उज्जैनी, कुंदा, पचौर और मझौली के लगभग दो हजार स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने परियोजना का खुलकर समर्थन किया।


ग्रामीणों का कहना है कि भूमिगत कोयला खदान से प्रदूषण न के बराबर होगा और परियोजना से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे क्षेत्र का विकास होगा। पचौर गांव की निवासी बसंती रावत ने खुशी जताते हुए कहा कि खदान शुरू होने से बच्चों के साथ-साथ महिलाओं का भी कल्याण होगा और स्थानीय लोगों की जिंदगी में खुशहाली आएगी।
अडानी समूह को मिला खनन का जिम्मा
यह परियोजना भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा 2022 में स्पर्धात्मक बोली के तहत अडानी समूह की कंपनी महान एनरजेंन लिमिटेड को आवंटित की गई है। यह भूमिगत कोयला खदान 1130 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली है, जो उज्जैनी, कुंदा, पचौर और मझौली गांवों को कवर करती है। हालांकि, संचालन के लिए केवल 34 हेक्टेयर राजस्व भूमि की आवश्यकता होगी।
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सभी पैरामीटर तय सीमा के अनुरूप
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार वायु गुणवत्ता, जल गुणवत्ता, जल संसाधन, ध्वनि स्तर, भूमि और मृदा की गुणवत्ता का अध्ययन किया गया, जिसमें सभी पैरामीटर तय सीमा के अनुरूप पाए गए। साथ ही, समुचित पर्यावरणीय प्रबंधन योजना का भी प्रावधान रखा गया है।
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51 वर्षों तक चलेगा संचालन
इस परियोजना का संचालन 51 वर्षों तक किया जाएगा, जिसमें आधुनिक तकनीक से भूमिगत उत्खनन द्वारा प्रतिवर्ष 30 लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के चलते पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिससे स्थानीय लोगों की आय और जीवन स्तर में सुधार होगा। साथ ही, मध्यप्रदेश सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी।




