शारदा धाम की गोद में पसरा कचरे का साम्राज्य मंदिर अस्पताल परिसर बना बीमारियों का केंद्र, सीएमओ व प्रबंध समिति दोनों उत्तरदायी
अस्पताल परिसर बना बीमारियों का केंद्र

शारदा धाम की गोद में पसरा कचरे का साम्राज्य मंदिर अस्पताल परिसर बना बीमारियों का केंद्र, सीएमओ व प्रबंध समिति दोनों उत्तरदायी
मैहर :
माँ शारदा मंदिर परिसर।
जहाँ एक ओर माँ शारदा की नगरी में प्रतिदिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है, वहीं मंदिर परिसर के भीतर स्थित आपातकालीन चिकित्सालय जिसे आपदा या तत्काल चिकित्सा सेवा के लिए निर्मित किया गया है आज गंदगी, सड़ांध और रोगों का स्रोत बन चुका है। माँ शारदा प्रबंध समिति द्वारा लाखों रुपये व्यय कर इस चिकित्सालय भवन, छाया-पट्ट (टीनशेड) और आवश्यक सुविधाओं का निर्माण कराया गया किंतु नगर पालिका और मंदिर समिति की संयुक्त उपेक्षा के कारण यह स्थान कचरे के ढेर और बदबू के गड्ढे में तब्दील हो गया है।
संवेदनशील स्थान पर गंदगी प्रशासनिक निकम्मापन उजागर
मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालु, विशेषकर वृद्धजन, महिलाएँ और रोगी यदि किसी स्वास्थ्य आपात स्थिति में इस चिकित्सालय की ओर रुख करें तो उन्हें चिकित्सा से पहले संक्रमण और गंदगी का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति मानव जीवन के अधिकार और स्वास्थ्य की न्यूनतम गारंटी को सीधा चुनौती देती है।
मुख्य नगर अधिकारी और समिति दोनों की विफल है पवित्र क्षेत्र स्वच्छ रखने में
नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी की यह संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है कि सार्वजनिक तथा धार्मिक स्थलों की नित्य सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, किंतु देखा जा रहा है कि सफाई कार्य महज़ औपचारिकता बन कर रह गया है।
दूसरी ओर मंदिर समिति अपनी जिम्मेदारी नगर परिषद पर टाल कर मौन बैठी है, जबकि समिति के पास भी पृथक सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं।
धार्मिक स्थल की मर्यादा का अपमान
भारत सरकार तथा राज्य शासन द्वारा तीर्थस्थलों की स्वच्छता संबंधी निर्देशिका, संक्रमण नियंत्रण नियम, और भीड़-नियंत्रण एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य निर्देश स्पष्ट रूप से यह कहते हैं कि धार्मिक परिसर
चिकित्सालय और सार्वजनिक स्थल हर हाल में स्वच्छ रोग-मुक्त और सुचारु रूप से संरक्षित रहेंगे।
यह घोर लापरवाही न केवल प्रशासनिक नियमों की अवहेलना है, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और धर्म की मर्यादा का भी अपमान है।
कलेक्टर महोदय से आग्रह कार्यवाही अवश्य करें
इस पूरे प्रकरण में स्पष्ट है कि
नगर परिषद के मुख्य नगर अधिकारी कर्तव्य विमुख हैं कारण भी स्पष्ट है कि सीएमओ प्रभारी है तीन-तीन नगर पालिका का बोझ है मैहर बड़ी नगर पालिका है यहां के नगर पालिका अध्यक्ष आज तक रिक्त पड़ी सीएमओ पद पर नियमित निर्धारित सीएमओ नहीं ला पाए जिस वजह से अतिरिक्त समस्याएं आ रही है राजनीतिक इच्छा शक्ति का अभाव या भारतीय जनता पार्टी की कौन सी नीति है मैहर जैसे पवित्र धार्मिक एवं संवेदनशील स्थान पर नियमित सीएमओ को भेजने में भाजपा सरकार असमर्थ नजर आ रही है ?
मंदिर समिति अपने दायित्वों से पलायन कर रही है,और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित है।
समिति की सफाई व्यवस्था की समीक्षा हो, मंदिर चिकित्सालय परिसर में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए। यह तीर्थ भूमि है, गंदगी की शरणस्थली नहीं।
माँ शारदा की छाया में पवित्रता, सेवा और स्वास्थ्य का वास हो ना चाहिए अपवित्रता रोग और लापरवाही का नहीं।




