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मऊगंज में पत्रकारिता की 'हुंकार': दिव्यांग पत्रकार के अपमान ने हिला दिया पुलिस प्रशासन, आए जिम्मेदार!**

कलम का सिपाही न झुका न डरा: श्रमजीवी पत्रकार संघ की एकता के आगे कप्तानी एक्शन; लौर और नईगढ़ी में थानों के चेहरे बदले

मऊगंज में पत्रकारिता की ‘हुंकार’: दिव्यांग पत्रकार के अपमान ने हिला दिया पुलिस प्रशासन, आए जिम्मेदार!**

**कलम का सिपाही न झुका न डरा: श्रमजीवी पत्रकार संघ की एकता के आगे कप्तानी एक्शन; लौर और नईगढ़ी में थानों के चेहरे बदले!**

**मऊगंज | जब सत्ता का नशा और वर्दी का गुरूर सर चढ़कर बोलने लगे, तब कलम की ताकत ही उसे जमीन पर लाती है।” मऊगंज जिले में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला है। दिव्यांग पत्रकार **दीपक गुप्ता** के साथ हुई बदसलूकी और खरीदी केंद्र माफियाओं की दबंगई के खिलाफ जब **मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ** ने मोर्चा खोला, तो पूरे जिले की पुलिसिंग पर सवाल खड़े हो गए। परिणाम स्वरूप, मऊगंज पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार सोनी को न केवल मामला दर्ज करना पड़ा, बल्कि दो थानों के प्रभारियों को बदलकर अपनी व्यवस्था में ‘सर्जरी’ करनी पड़ी। विवाद की जड़ तब शुरू हुई जब एक खरीदी केंद्र संचालक के भतीजे ने अपनी दबंगई दिखाते हुए दिव्यांग पत्रकार दीपक गुप्ता को सरेआम भद्दी गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। पहले तो पुलिस ने ढुलमुल रवैया अपनाया, लेकिन श्रमजीवी पत्रकार संघ के नेतृत्व में जब पत्रकारों की एकजुटता ने तूल पकड़ा, तब एसपी ने तत्काल हस्तक्षेप किया। इसी का नतीजा है कि लौर थाना प्रभारी को वहां से हटाकर **राजेश पटेल** को कमान सौंपी गई है, ताकि माफियाराज और गुंडागर्दी पर नकेल कसी जा सके। इधर, नईगढ़ी थाने में भी ‘सुशासन’ की बड़ी कार्रवाई हुई है। पूर्व थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर, जो अगस्त क्रांति मंच के संयोजक **कुंज बिहारी तिवारी** के गंभीर आरोपों और कोर्ट की विवेचना में घिरे हुए थे, उन्हें आखिरकार कप्तान दिलीप सोनी ने लाइन अटैच कर दिया। अब नईगढ़ी की कमान **गोविंद तिवारी** को दी गई है। इन बदलावों ने यह साफ कर दिया है कि मऊगंज जिले में अब न तो पत्रकारों से बदतमीजी बर्दाश्त की जाएगी और न ही भ्रष्टाचार को संरक्षण मिलेगा। मऊगंज जिले में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एसपी का यह कदम सराहनीय है। लेकिन असली चुनौती अब शुरू होती है—क्या नए प्रभारी राजेश पटेल और गोविंद तिवारी क्षेत्र के माफिया तंत्र को तोड़ पाएंगे? क्या अब पत्रकारों को फील्ड में रिपोर्टिंग करते समय गाली-गलौज नहीं, बल्कि सम्मान मिलेगा? यह बदलाव केवल चेहरों का तबादला नहीं, बल्कि उन अपराधियों और भ्रष्ट अधिकारियों को चेतावनी है जो समझते थे कि वे कानून से ऊपर हैं

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