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मऊगंज में नवविवाहिता की दर्दनाक मौत: 10 पेज के सुसाइड नोट में पति-सास पर गंभीर आरोप, जांच शुरू

मऊगंज में 24 साल की नवविवाहिता का शव घर में फंदे से लटका मिला। सुसाइड नोट में पति और सास पर मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए। पुलिस जांच जारी है। पूरी घटना और अपडेट पढ़ें।

मऊगंज में नवविवाहिता की दर्दनाक मौत: 10 पेज के सुसाइड नोट में पति-सास पर गंभीर आरोप, जांच शुरू

मऊगंज में 24 साल की नवविवाहिता का शव घर में फंदे से लटका मिला। सुसाइड नोट में पति और सास पर मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए। पुलिस जांच जारी है। पूरी घटना और अपडेट पढ़ें।

मध्यप्रदेश के मऊगंज क्षेत्र से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने इलाके को झकझोर कर रख दिया है। 24 साल की नवविवाहिता करुणा द्विवेदी का शव घर के कमरे में फंदे से लटका मिला। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना 24 दिसंबर की सुबह सामने आई। मौके से एक लंबा सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें करुणा ने पति और सास पर लगातार प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।

 पूरा मामला क्या है?

परिजनों के अनुसार, करुणा की शादी 8 मई 2025 को बधैया भलुहा गांव के निवासी शिवम मिश्रा से हुई थी। करुणा के भाई ने बताया कि शादी के कुछ ही दिनों बाद से दहेज और घरेलू मांगों को लेकर तनाव बढ़ने लगा। आरोप यह भी है कि ससुराल पक्ष अक्सर ताने देता था और छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होते थे। परिवार का कहना है कि बीते महीनों में हालात लगातार बिगड़ते चले गए।

सुसाइड नोट में दर्द — “रोज-रोज की प्रताड़ना से टूट गई हूं”

मिले हुए सुसाइड नोट में करुणा ने लिखा कि वह मानसिक और शारीरिक तनाव से टूट चुकी थी। कई जगहों पर उसने दुख व्यक्त करते हुए बताया कि झगड़े, ताने और आरोपों ने उसे अंदर से खत्म कर दिया। नोट में पति और सास पर लगातार अपमानित करने और मारपीट जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं। हालांकि, पुलिस का कहना है कि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी

10 पेज का सुसाइड नोट

करुणा ने सुसाइड नोट में लिखा- मैंने आज खुद को खत्म करने का सोचा है। पहले भी कई बार कोशिश की, लेकिन नहीं हो सका। मैं अपना दुख किसी को बताना चाहती थी, लेकिन क्या करूं आपबीती सुनाने के लिए कोई मिला ही नहीं। पति को सुख–दुख का साथी माना था, लेकिन अफसोस उसी ने मजाक बना दिया। समझ आया कि संत महात्मा क्यों कहते हैं कि कोई अपना नहीं होता। कोई रिश्ता–नाता नहीं होता, लेकिन फिर यह क्यों कहते हैं कि पति परमेश्वर होता है।

जब पति कुछ न समझे, अपनापन न दिखाए, सिर्फ अपना सुख देखे…बात-बात पर झगड़ा करे, गाली दे तो फिर उस पति को क्या कहते हैं? ऐसे में पत्नी को कहां जाना चाहिए? क्या करना चाहिए? क्या सुसाइड ही बेस्ट ऑप्शन है? मैं पूछती हूं, क्यों मुझे हर जगह गलत ठहराया गया? पति मुझसे कहते हैं कि तुम्हारे अंदर अकड़ बहुत है। तुमने मां–बेटे को अलग किया। चूल्हा बंटवा दिया। तुम जैसी लड़कियों को शादी नहीं करनी चाहिए। क्या मैं सच में बहुत बुरी हूं? मैं पूछती हूं कि कब मैंने मां–बेटे को अलग करने की कोशिश की?

सुसाइड नोट में लिखा है- आपने मुझे इतना ज्यादा परेशान कर दिया कि मैं पागल हो गई हूं। जीने के लिए कुछ बचा ही नहीं। दिनभर टॉर्चर कर-करके दिमाग में भर दिया है कि मैं अब किसी काम की नहीं रही। आपको टाइम नहीं है मुझसे बात करने का, हाल-चाल पूछने का। अगर लड़ाई करनी हो, तो सारा दिन फोन लगाकर लड़ाई करते हैं, टॉर्चर करते हैं।

आपसे शादी करके मैं क्या, कोई भी लड़की जान दे देगी। इतने घटिया किस्म के पति हैं कि क्या बताऊं। ऐसा लगता है कि जैसे सपना देख रही हूं। हर सुबह सोचती हूं कि शायद सब कुछ ठीक हो जाए, लेकिन ऐसा होने से रहा। कुछ सास होती हैं, जिनको बहू से नफरत होती है। वही है मेरी सास। जिंदगी बर्बाद कर दी। मैं दोनों मां बेटे को माफ नहीं करूंगी। मुझे जितना मारा-पीटा है, गाली दी है, उसका फल मिलेगा।

करुणा ने सुसाइड नोट में लिखा है- ऐसे शब्द बोलते हैं, जो औरत को वैवाहिक जीवन में कभी सुनने को न मिलें। सास कहती हैं कि इससे शादी करके गलती की। रतनगवां वाली लड़की से करते। उसके भाई सब काम कर देते। उसके यहां से सामान भी बहुत आता। क्या हमने मना किया था? उस लड़की की शादी दिसंबर 2024 में हुई थी, तब तो हम लोग किसी को जानते नहीं थे।

लड़की वाले 10 जगह ढूंढते हैं, तो हमारे यहां भी देखने गए थे, नहीं करते आप। अब कहते हैं कि तुम्हारा भाई शादी के लिए भीख मांग रहा था। तुम लोग गरीब हो, चेन नहीं दे पाए, अंगूठी ठीक नहीं थी। क्या किसी को इतना टॉर्चर करना चाहिए कि सामने वाला अपने आप को खत्म कर ले? अब तक मुझे न जाने कितनी बार तलाक के लिए कहा। न जाने कितनी बार मुझे पीटा। गाली तो हर वक्त देते रहते हैं।

करुणा ने लिखा है- ससुराल वाले कहते हैं कि क्या लाई हो मायके से। गरीब घर की लड़की लाए। अनाथ की लड़की से शादी किए हैं। क्या मैं अनाथ हूं? ऐसा था, तो शादी क्यों की? क्या उस बात के लिए रोज प्रताड़ित करना चाहिए। मैंने पैर पकड़कर माफी मांगी, लेकिन पति ने इतनी जोर से चार थप्पड़ मारे कि कान में पहनी बाली अलग हो गई। उस दिन से कान में दर्द रहने लगा।

फिर भी सोचा, इंसान धीरे-धीरे बदल जाएगा, लेकिन मैं गलत थी। यह इंसान कभी नहीं बदल सकता। इनको खुद से मतलब है। मैं मर भी जाऊंगी, तो भी उसे माफ नहीं करूंगी। 12 नवंबर को मेरा पेपर था। वह पेपर दिलाने गए थे, फिर रास्ते में लड़ाई कर ली।

करुणा ने सुसाइड नोट में आगे लिखा है- मेरे अंदर अब सहने की शक्ति नहीं रही। सब लोग कहते हैं कि पति को ऑर्डर नहीं, रिक्वेस्ट करो। उससे भीख मांगो, तब मिलता है, लेकिन मुझे भीख मंजूर नहीं। इस मारपीट, गाली और भीख मांगने की नौबत से तो छुटकारा पा ही जाऊंगी। चाहे कीड़ा-मकोड़ा कुछ भी बनूं, लेकिन मुझे यह शरीर पसंद नहीं।

ऐसी घटिया सोच वाले इंसान के साथ नहीं रह सकती। आपको पैसा चाहिए था, जो मिला नहीं, इसलिए मेरी जिंदगी नर्क बना दी। मैं वो नहीं जो किसी को नुकसान पहुंचाए, इसलिए इस दर्द से खुद को बचाने के लिए यहीं सफर खत्म करना चाहती हूं। अपना तलाक किसी और के लिए बचाकर रखें, क्योंकि हो सकता है कि दूसरी समझदार निकले।

एक दिन सास मुझे पति के कमरे से उठाकर ले गई। कहा कि तुम उसके साथ नहीं सोओगी। तब मैं समझ गई कि वह दोनों को अलग करना चाहती हैं। इसके बाद मैंने मायके आने का फैसला किया। घर आने के बाद किसी ने एक शब्द बात नहीं की।

फिर भी मैंने पति को मैसेज किया। उन्होंने स्क्रीनशॉट लेकर पिता और दादी को भेजा। मैंने दर्द पति को सुनाया तो उन्होंने दीदी और पिताजी को दिखाया। यह है उनकी जिंदगी में मेरी औकात। जिंदगी इतनी तंग आ गई कि सुसाइड के सिवा कुछ सही नहीं लग रहा।

पति को सिर्फ शारीरिक सुख से मतलब

सुसाइड नोट में करुणा ने लिखा है- पति को सिर्फ शारीरिक सुख से मतलब है। वह यह देख नहीं सकते कि पत्नी बीमार है। खुश है या नहीं है। अगर मना कर दिया, तो फिर झगड़ा और मारपीट। इसे प्यार कहते हैं क्या? मैं इस व्यक्ति को माफ नहीं करूंगी। दूसरी लड़कियों से संपर्क रखने वाला बीवी को खुश नहीं रख सकेगा, चाहे कोई भी हो।

  मायके वालों का बड़ा दावा

करुणा के भाई ने बताया कि बहन कई बार मायके आई और उसने बताया कि घर-परिवार में शांति नहीं है। आरोप है कि छोटी-छोटी चीजों को लेकर झगड़े होते थे और कई बार करुणा को घर से बाहर निकाल दिया जाता था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने समझाने की कोशिश की, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

 जांच के बाद ही सच्चाई साफ

स्थानीय पुलिस ने मामले को सुसाइड के तौर पर दर्ज किया है। सुसाइड नोट की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी पर सीधे आरोप तय नहीं किए गए हैं। सभी पक्षों के बयान दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने अपील की है कि अफवाहों से बचें और जांच पूरी होने दें।

मदद लेना जरूरी

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना के मामलों में समय रहते सहायता क्यों नहीं ली जाती। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में परामर्श, परिवार की मदद और कानून का सहारा बेहद जरूरी है। जीवन अनमोल है और किसी भी परिस्थिति में हार मानना समाधान नहीं होता।

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