कागजों में हो रहा गौ संरक्षण सड़को पर बेसहारा गोवंश
आदेश जारी लेकिन कार्रवाई गायब बेसहारा गौवंशो की दुर्दशा*

*रीवा ब्रेकिंग*
*कागजों में हो रहा गौ संरक्षण सड़को पर बेसहारा गोवंश*
*आदेश जारी लेकिन कार्रवाई गायब बेसहारा गौवंशो की दुर्दशा*
कमिश्नर और कलेक्टर बार-बार कहते हैं की सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंश को पड़कर गौशालाओं में भेजो चारे भूसे का इंतजाम करो लेकिन सवाल वही खड़ा है कि पकड़ेगा कौन आदेश जारी होते हैं बैठके होती हैं और कागजों में गोवंश सुरक्षित बता दिए जाते हैं लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वे बेसहारा है देखा जा रहा है कि गोवंश अब भी शहर की सड़कों और गलियों में खुलेआम घूमते रहे हैं रीवा और मऊगंज जिलों में अनुमानित 2 लाख बेसहारा गोवंश खुले में भटक रहे हैं मुख्यमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि हर हाल में इन्हें गौशालाओं तक पहुंचाया जाए कमिश्नर और कलेक्टर ने भी टीम गठित करने के आदेश दिए लेकिन 185 गौशालाएं सिर्फ कागजों में संचालित है बजट भी जारी होता है लेकिन गोवंश की हालत जस की तस बनी हुई है।
*आदेश बनाम हकीकत*
प्रशासन के आदेशों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर साफ झलकता है ना तो गोवंश पकड़े जाते हैं ना गौशालाओं तक पहुंचते हैं इससे दो बड़े सवाल खड़े होते हैं क्या गोवंश को सड़कों पर खुला छोड़ना ही हमारी व्यवस्था का हिस्सा बन गया है बजट लेने वाली गौशालाओं की जिम्मेदारी कौन तय करेगा।
*गोवंश सड़क पर रहेंगे तो दुर्घटना होगी ही*
गोवंश सड़कों पर रहेंगे तो न सिर्फ दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ेगा बल्कि यह हमारी संवेदनहीनता का प्रतीक भी है प्रशासन को केवल आदेश जारी करने के बजाय जिम्मेदारी तय करनी होगी और समाज को भी सोचना होगा कि क्या हम सचमुच गोवंश की रक्षा कर रहे हैं या सिर्फ उनके नाम पर राजनीति और दिखावा।




