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खाद नहीं ये तो अमृत है.. रात्रि 2:00 बजे से लग जाते हैं लाइन में फिर भी कई बार लौटना पड़ता खाली हाथ

किसानों ने अपना दर्द किया वयां रात्रि से लाइन में लगने के बाद भी शाम को लौटना पड़ता है खाली हाथ

खाद नहीं ये तो अमृत है.. रात्रि 2:00 बजे से लग जाते हैं लाइन में फिर भी कई बार लौटना पड़ता खाली हाथ

किसानों ने अपना दर्द किया वयां रात्रि से लाइन में लगने के बाद भी शाम को लौटना पड़ता है खाली हाथ

♦रीवा : गुढ़ समाचार

रीवा जिले के सहकारी विपणन केंद्र गुढ़ में इस समय खाद के लिए किसानों में मारामारी मची हुई है सोमवार के बाद आज मंगलवार को फिर रात्रि 2:00 बजे से किसानों की कतारे लग चुकी है।किसान खाद के चक्कर में घर के बजाय विपरण केंद्र में रतजगा कर रहे हैं।रात्रि से लाइन में लगने के बाद भी शाम तक उनको खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ता है खाद के लिए लाइन में लगने के लिए महिलाएं भी पुरुषों का बराबर साथ दे रही हैं

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लेकिन अवस्था के चलती लाइन का कोई मतलब नहीं निकलता दरअसल कल तो तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार के पहुंचने के बाद टोकन सुविधा तो कर दिया गया है लेकिन ऐसा नहीं लग रहा है कि किसानों के भीड़ के आगे टोकन सुविधा चल पाएगा क्योंकि किसान भी बहुत ही आक्रोशित हैं यह भीड़ देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह खाद नहीं अमृत है जिसके लिए किसान रात दिन बराबर विपणन केंद्र में समय दे रहे हैं।किसानों ने अपना दर्द वया करते हुए बताता की रात्रि से लाइन लगने के बाद सांम को खाली हाथ लौटना पड़ता है।उनका कहना है कि शासन प्रशासन किसानों को खून की आंसू रुला रहा है।.

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जब शासन प्रशासन को यह पता है कि किसानों की खाद इसी समय जरूरत होती है तो वह पहले से व्यवस्था क्यों गई नहीं कर लेता हम लोगों की पूरी खेती चौपट हो रही है हम लोग अगर खाद के लिए लाइन में लगते हैं तो खेत में मवेशी पूरा फसल चौपट कर देते हैं आखिर सबसे बड़ी मार हम किसानों की है।

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