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Sehore: बिना अनुमति जिले में बिक रहे जैविक उत्पादों पर रोक, सात दिन में स्टॉक नहीं हटाया तो भुगतना होगा नतीजा

सात दिन में स्टॉक नहीं हटाया तो भुगतना होगा नतीजा

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बिना अनुमति जिले में बिक रहे जैविक उत्पादों पर रोक, सात दिन में स्टॉक नहीं हटाया तो भुगतना होगा नतीजा

सीहोर जिले में बिना अनुमति बिक रहे जैविक उत्पादों और टॉनिक उर्वरकों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। विक्रेताओं को 7 दिन में स्टॉक हटाने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

बिना अनुमति के कृषि उत्पादों की बिक्री अब जिले में नहीं चलेगी। विक्रेताओं को सख्त चेतावनी दी गई है कि या तो उत्पाद हटाएं या फिर दंड भुगतने के लिए तैयार रहें। किसान हित को सर्वोपरि मानते हुए प्रशासन ने यह बड़ा कदम उठाया है। सीहोर जिले में बिना मान्यता के बिक रहे जैविक उत्पाद, बायो-स्टिमुलेंट और अन्य टॉनिक उर्वरकों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है

कृषि उप संचालक ने सात दिन के भीतर स्टॉक हटाने के निर्देश दिए हैं। तय समय के बाद उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। ज्ञात हो कि जिले में बड़ी संख्या में कृषि विक्रेताओं द्वारा बिना अनुमति के जैविक उत्पाद, बायो-स्टिमुलेंट एवं टॉनिक उर्वरकों की बिक्री की जा रही थी। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर कृषि उप संचालक अशोक कुमार उपाध्याय ने इस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश जारी किया है।

प्रतिबंधित उत्पादों की विस्तृत सूची जारी
जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ह्यूमिक व फुल्विक एसिड, अमीनो एसिड, एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन मिश्रण, समुद्री शैवाल अर्क, स्पिरुलिना, प्रोटीन हाइड्रोलाइसेस, माइक्रोबियल तत्व, बैक्टीरियल बायोमास, सेकरोमाइसिस, ग्रोथ रेगुलेटर और अन्य सभी प्रकार के टॉनिक उर्वरक उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के अंतर्गत आते हैं, और इनके विक्रय के लिए वैध अनुज्ञा अनिवार्य है।.

बिना अनुमति विक्रय पर गिरेगी गाज
अगर, कोई विक्रेता या निर्माता कंपनी उपरोक्त उत्पादों को जिले में अनुमति लिए बिना बेचती या संग्रहित करती है, तो उसे अवैध व्यापार माना जाएगा। इस पर उर्वरक नियंत्रण आदेश एवं कीटनाशी नियमों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पूर्व में जारी की गई जी-1, जी-2 प्रकार की अनुमतियां स्वतः निरस्त मानी जाएंगी।

विक्रेताओं को 7 दिन की मोहलत, फिर होगी कार्रवाई
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिले में मौजूद ऐसे सभी विक्रेताओं को सात दिन का समय दिया गया है कि वे अपने विक्रय केंद्र से यह अवैध जैविक उत्पाद तुरंत हटाएं। उन्हें निर्माता कंपनियों को यह स्टॉक वापस करना होगा। सात दिनों के भीतर स्टॉक नहीं हटाने पर संबंधित विक्रेता व कंपनी पर सीधे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

किसानों को मिलेंगे प्रमाणित उत्पाद
इस सख्त कदम का मुख्य उद्देश्य किसानों को केवल गुणवत्तापूर्ण और मान्य उत्पाद उपलब्ध कराना है। आदेश के अनुसार, कोई भी जैविक या मिश्रित उर्वरक अब तभी बेचा जाएगा जब वह कृषि विभाग से वैध अनुज्ञप्ति प्राप्त हो और कृषि विकास अधिकारी (पदेन अनुज्ञापन अधिकारी) द्वारा स्वीकृत हो।

 

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