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कागजों में न्याय जमीन पर अन्याय दर-दर की ठोकर खा रहा वृद्ध किसान कोर्ट के स्थगन आदेश के बाद भी स्थानीय प्रशासन की चुप्पी सन्देहास्पद और निंदनीय

कोर्ट के स्थगन आदेश के बाद भी स्थानीय प्रशासन की चुप्पी सन्देहास्पद और निंदनीय

सिरमौर ब्रेकिंग

कागजों में न्याय जमीन पर अन्याय दर-दर की ठोकर खा रहा वृद्ध किसान

कोर्ट के स्थगन आदेश के बाद भी स्थानीय प्रशासन की चुप्पी सन्देहास्पद और निंदनीय

 

मामला रीवा जिले के जवा तहसील क्षेत्र अंतर्गत बधबर गांव का

✍ कमलेश तिवारी

रीवा जिले के जवा तहसील अंतर्गत ग्राम बधवर में रहने वाले किसान बृद्ध गेंदालाल मिश्रा न्याय के लिए मीना से दर-दर की ठोकरे खा रहे# हैं तहसीलदार से लेकर जिला प्रशासन तक आवेदन और आदेश की प्रतियो का पुलिंदा लिए यह किसान बस यही गुहार लगा रहा है मुझे मेरी जमीन पर मेरा अधिकार दिला दीजिए किसान गेंदालाल मिश्रा की भूमि (खसरा नंबर 169/2 रकवा 0.412 हे.) पर अवैध कब्जे की कोशिशे लगातार जारी है। कोर्ट का स्पष्ट स्थगन आदेश होने के बावजूद अतिक्रमण करने वालों के हौसले बुलंद है और स्थानीय प्रशासन की चुप्पी सन्देहास्पद और निंदनीय है तामील न्यायालय द्वारा 12 दिसंबर 2023 को पारित आदेश में अतिक्रमण हटाने और यथा स्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया था इसके बावजूद आज तक किसान को ना तो सुरक्षा मिली ना ही आदेश का पालन हुआ सवाल यह है कि क्या तहसीलदार और पटवारी की भूमिका केवल आदेश पारित करने तक सीमित है क्या जमीनी स्तर पर कार्रवाई की कोई जवाब देही नही। पीड़ित किसान ने कई बार राजस्व विभाग तहसील कार्यालय एवं पुलिस प्रशासन से निवेदन किया कि जबरन कब्जे की रोकथाम की जाए लेकिन हर बार कार्यवाही होगी का झुनझुना थमा दिया गया किसान का कहना है कि विरोध करने पर उसे धमकाया जाता है गालियां दी जाती हैं और मारपीट की धमकी भी मिलती है अब सवाल यही उठता है कि जब स्थगन आदेश पहले से मौजूद है तो उसे लागू करने में देरी क्यों क्या प्रशासन की आंखे उन ताकतवर लोगों के सामने झुकी हुई है जो आदेश को भी रौंदते हैं अगर एक वृद्ध बीमार और असहाय किसान की बात अनसुनी की जा रही है तो फिर आम आदमी को न्याय कैसे मिलेगा यह मामला सिर्फ एक जमीन का नहीं है यह उस भरोसे का है जो एक आम नागरिक अपने प्रशासन पर करता है गेंदालाल मिश्रा की आंखों में आज भी उम्मीद की लौ है।

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