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जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही, निलंबन अवधि में सचिव ने पंचायत के खाते से निकाल लिया लाखों रुपये

सचिव सरोज पाण्डेय के भ्रस्टाचार को जिम्मेदार अधिकारियों का बढ़ावा

जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही, निलंबन अवधि में सचिव ने पंचायत के खाते से निकाल लिया लाखों रुपये

 

सचिव सरोज पाण्डेय के भ्रस्टाचार को जिम्मेदार अधिकारियों का बढ़ावा

सचिव व अधिकारियों की लापरवाही व मनमानी का मामला पहुंचेगा हाईकोर्ट

प्रदेश की मोहन सरकार भ्रष्टाचार कम करने और जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाने की दिशा मे भले लाख प्रयास कर ले परंतु, रीवा जिले के जिम्मेदार अधिकारी भ्रष्टाचार को कम नहीं होने नहीं देंगे, क्योंकि ये कसम खा कर कुर्सी पर बैठे है, और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा कर रहे है, रीवा मे शासन के खाते से लूट किस हद तक जारी है, यह बात सुन जान कर कर कोई हैरान हो जायेगा, परन्तु कुर्सी पर बैठे रीवा के जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी का जरा सा भी भान नहीं है, ना ही इन्हें अपनी नाकामी पर कोई अफसोस है, बल्कि रीवा जिले के कुछ अधिकारी कर्मचारी इतने बेशर्म और निरंकुश है कि ये अपने दायित्वों की भी परवाह नहीं करते, और खुद ये शासन के खजाने में डाका डाल रहें है तथा अपने मातहत कर्मचारियों को भी सरकार के खजाने को लूटने की पूरी छूट दे रखी हैं, कि लूट लो जिससे जितना लूटते बने, इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है…!

मामला रीवा जिले की जनपद पंचायत रायपुर कर्चुलियान का है, जंहा पूरे जिले मे सबसे अधिक भ्रष्टाचार हो रहा है, ग्राम पंचायत इंटार पहाड़ में पदस्थ एवं डढ़वा पंचायत के प्रभार में रहते हुए सचिव सरोज पाण्डेय द्वारा भ्रष्टाचार की ऐसी इमारत गढ़ी गई है, जो किसी भी सूरत में क्षम्य नहीं होनी चाहिए परंतु ऐसे नकारे और निकम्मे अधिकारी जिले मे बैठे है कि सब मिल बांट कर भ्रष्टाचार कर रहे है, और शासन की क्षति कर रहे है. और भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी तरह से उदासीन है, तथा यहां पदस्थ सचिव और उसके पति हरीश पाण्डेय उर्फ नटवरलाल ने इंटार पहाड़, डढ़वा और पूर्व में जल्दर पंचायत में पदस्थापना के दौरान 50, लाख रुपये से अधिक का भ्रष्टाचार कर चुके है, लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामले मे सचिव सरोज पाण्डेय निलंबित भी हुई, परंतु निलंबन के दौरान भी इनका भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ और अधिकारियों की मिली भगत से निलंबन के समय भी इन्होंने पंचायत के खातों से अलग अलग दिनांक मे लाखों रुपये निकाल लिये जो कदाचरण की श्रेणी में आता है, और शासन को बड़ी छति पहुंच रही है, यह सब किसकी सह से हो रहा है, और इससे शासन को कितनी क्षति पहुंच रही है, यह गंभीर जांच का विषय है, लेकिन ऐसे दोषी और लापरवाह अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही होनी चाहिए…!

सचिव के निलंबन के बाद, कब और क्यों तथा कितने पैसे निकाले गए…?

सचिव सरोज पाण्डेय के खिलाफ शिकायत हुई 05/05/2025 को संभाग आयुक्त रीवा एवं जिला पंचायत रीवा, कार्यालय में, शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर द्वारा तत्काल जनपद पंचायत रायपुर कर्चुलियान में पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी संजय सिंह को पत्र क्र. 632/शि.का./ज. प./ दिनांक 06/05/25 को जांच के लिए आदेश जारी किया गया, जिसके परिपालन में जनपद पंचायत रायपुर से दो सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई गई जांच में सचिव सरोज पाण्डेय को दोषी पाया गया और इनके खिलाफ कार्यवाही प्रस्तावित की गई, इधर कार्यवाही किए जाने के बाद प्रतिवेदन 19/05/2025 को जांच के संपूर्ण दस्तावेज़ों सहित जिला पंचायत सीईओ को भेज दिया गया, जनपद पंचायत से प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर की अनुशंसा पर जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर ने दोषी सचिव सरोज पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया, निलंबन में पत्र क्र. 1477/जि.प./पंचायत/2025 पारित है, निलंबन का शीघ्र पालन करने और सचिव का वित्तीय अधिकार समाप्त करने आदेश जारी किया गया। वहीं इस बीच शिकायत से लेकर जांच के दौरान सचिव सरोज पाण्डेय और सरपंच नामदेव द्वारा डढ़वा पंचायत के खाते से 06/05/2025 से 13/05/2025 के मध्य एक मुस्त 4,12,500 रुपये निकाल कर पैसे का दुरूपयोग किया गया, फिर भी जिम्मेदार तमाशा देखते रहे या फिर अपना हिस्सा लेकर चुप बैठ गए।

कमिश्नर रीवा द्वारा आगामी सुनवाई तक दिया गया था स्थगन

संभाग आयुक्त बी एस जामोद द्वारा 20/06/2025 को आगामी सुनवाई तक के लिए स्थगन जारी किया था, इसी बीच इसके द्वारा सबसे पहले जनपद कार्यालय में सांठ-गांठ करके 30/06/2025 को फिर डढ़वा पंचायत के खाते से चार बार में 3,69,580 रुपये निकाल लिए गए गई और इस राशि को भी सरपंच सचिव द्वारा खुर्द-बुर्द कर दी गई, सबसे पहले इसने 30, जून को 22,000, रुपये निकले फिर 15,000, फिर उसी दिन 1,28,000, फिर 28,000, अंत मे 1,76,500, रुपये खाते से निकाल लिए , तत्पश्चात पुनः 01/07/2025 को सचिव सरोज पाण्डेय के भ्रष्टाचार के मामले की सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के समक्ष संभागायुक्त ने सचिव को दिया गया स्थगन खारिज कर समस्त वित्तीय और सचिवीय अधिकारों पर रोक लगा दी गई, लेकन इसके बाद फिर सचिव सरोज पाण्डेय ने कमिश्नर के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए निलंबन के दौरान ही 08/07/2025 को पुनः 38,000, फिर 25,00, उसके बाद 76,000, और अंतिम में फिर 50,000 रुपये यानी कि निलंबन के बाद सचिव द्वारा 1,66,500 रुपये निकाल कर न्यायालय के आदेश की अवहेलना की गई है जो गंभीर अपराध और कदाचरण की श्रेणी में आता है अतः दोषी सचिव और सरपंच के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करते हुए एफआईआर दर्ज होनी चाहिए, साथ ही इस मामले मे आदेश का पालन नहीं करवाने वाले अधिकारियों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए…!

शिकायत से लेकर जांच और कार्यवाही के बीच निकल गए 9,48,580, रुपये

भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी सचिव सरोज पाण्डेय कितनी निडर और बेखौफ है, कि सीधे तौर पर कानून की धज्जियां उड़ाते हुए शिकायत के बाद भी जैसे ही जांच शुरू हुई इसने तत्काल 6 जून को 4,12, 500 रुपये पंचायत के खाते से आहरित कर लिया, उसके बाद बीच मे फिर बिना किसी कार्य के 30/06/2025 को पुनः 3,69,580 आहरित किए गए इससे भी आगे हद तो तब हो गई जब कमिश्नर साहब द्वारा दिए गए स्थगन के खारिज होने पर भी सचिव ने अधिकारियों की लापरवाही और मिली भगत से निलंबन के दौरान 1,66,500 रुपये का आहरण कर सब को कठघरे मे खड़ा कर दिया है, इससे बड़ी लापरवाही और क्या हो सकती है इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करा कर मामले को हाइकोर्ट में ले जाया जायेगा ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जा सके। और दोषियों को सजा दिलाई जा सके सके खासकर इनको तो जेल जाने से कोई नहीं बचा सकता…!

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