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विंध्य का 'अघोषित स्वर्ग': क्या प्रशासन के अंधेरे में खो जाएगा 'दूसरा चित्रकूट' दुर्मनकूट धाम?

रीवा से 35 किमी और गुढ़ से महज 12 किमी दूर दुआरी अंचल में बसा यह धाम क्षेत्रीय लोगों के लिए किसी 'वरदान स्थली' से कम नहीं है।

विंध्य का ‘अघोषित स्वर्ग’: क्या प्रशासन के अंधेरे में खो जाएगा ‘दूसरा चित्रकूट’ दुर्मनकूट धाम?

दुआरी गुढ़, रीवा (मध्य प्रदेश)

विंध्य की पहाड़ियों में एक ऐसा दिव्य कोना छिपा है, जिसकी तुलना सीधे चित्रकूट से की जाती है। रीवा जिले के गुढ़ अंचल स्थित ‘दुर्मनकूट धाम’ प्रकृति और आध्यात्मिकता का वह संगम है, जिसे देखकर आँखें ठहर जाती हैं और मन भक्ति में डूब जाता है। लेकिन विडंबना देखिए, जहाँ आस्था का उजाला फैला है, वहाँ सरकारी विकास की एक किरण भी नहीं पहुँची है।

देवरहा बाबा की तपोस्थली: जहाँ पत्थर भी बोलते हैं ‘जय श्री राम’
दुर्मनकूट धाम की महिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह परम पूज्य देवरहा बाबा की प्राचीन तपोस्थली रही है। रीवा से 35 किमी और गुढ़ से महज 12 किमी दूर दुआरी अंचल में बसा यह धाम क्षेत्रीय लोगों के लिए किसी ‘वरदान स्थली’ से कम नहीं है।

अटूट जन-आस्था: यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि यहाँ की मिट्टी में वो शक्ति है जो हर अधूरी मुराद पूरी कर देती है।

दिव्य शांति: घने जंगलों के बीच बसी यह जगह पौराणिक काल के किसी ऋषि-आश्रम का अहसास कराती है।

आस्था के केंद्र में ‘अंधेरे’ का पहरा!
हैरानी की बात यह है कि जहाँ हजारों की भीड़ उमड़ती है, वहाँ बुनियादी सुविधाओं का नामोनिशान नहीं है। सबसे बड़ा सवाल बिजली की व्यवस्था पर है।

“जब सूरज ढलता है, तो यह पावन धाम अंधेरे में डूब जाता है। क्या हमारी आस्था इतनी सस्ती है कि यहाँ एक बल्ब जलाने तक की सुध प्रशासन को नहीं है?” — एक आक्रोशित स्थानीय श्रद्धालु

विकास की बाट जोहता ‘मिनी चित्रकूट’
दुर्मनकूट धाम में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की बेरुखी ने इसे ‘गुमनाम’ बना रखा है। विकास के नाम पर यहाँ की फाइलें आज भी दफ्तरों में धूल फांक रही हैं।

धाम की मुख्य मांगें:

विद्युतीकरण: पूरे परिसर और पहुँच मार्ग पर स्थायी बिजली की व्यवस्था।

सड़क संपर्क: पथरीले रास्तों की जगह सुदृढ़ डामर सड़कें।

पर्यटन सर्किट: इसे आधिकारिक तौर पर विंध्य पर्यटन मानचित्र में शामिल करना।

सुविधाएं: पीने का पानी और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए विश्राम गृह।

निष्कर्ष: कब जागेगा प्रशासन?
अगर सरकार इस ‘दूसरे चित्रकूट’ की सुध ले, तो यह न केवल रीवा बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए राजस्व और आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। दुर्मनकूट धाम पुकार रहा है—सिर्फ श्रद्धालुओं को ही नहीं, बल्कि उन सोए हुए जिम्मेदार अधिकारियों को भी, जिनकी फाइलों में यह स्वर्ग आज भी उपेक्षित हैदुआरी गुढ़, रीवा (मध्य प्रदेश)

 

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