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कांग्रेस की दिल्ली बैठक से कमल नाथ सहित MP के बड़े नेताओं की अनुपस्थिति पर उठे सवाल, भाजपा ने ली चुटकी

मध्य प्रदेश में कांग्रेस को और प्रभावी बनाने के लिए दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल ने प्रदेश के चुनिंदा पदाधिकारियों के साथ बैठक की

कांग्रेस की दिल्ली बैठक से कमल नाथ सहित MP के बड़े नेताओं की अनुपस्थिति पर उठे सवाल, भाजपा ने ली चुटकी

भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस को और प्रभावी बनाने के लिए दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल ने प्रदेश के चुनिंदा पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया, डा. विक्रांत भूरिया सहित अन्य वरिष्ठ नेता अनुपस्थित रहे। इसे लेकर मीडिया ने जब प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी से सवाल किए तो वह असहज हुए और झल्लाते हुए बोले कि किसे बुलाना है और किसे नहीं, यह हमारा आंतरिक मामला है। इस पर प्रदेश भाजपा ने तंज कसते हुए कहा है कि कमल नाथ बाहर, दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे भीतर, यही कांग्रेस की हकीकत है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दिल्ली की बैठक के लिए केवल प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कार्यसमिति के सदस्य कमलेश्वर पटेल को बुलाया गया था। इसमें मुख्य रूप से संगठन सृजन अभियान और आगामी विधानसभा सत्र में पार्टी की भूमिका पर बात होनी थी, इसलिए केवल उससे जुड़े व्यक्तियों को बुलाया गया। दिग्विजय सिंह चूंकि प्रदेश में कांग्रेस के लिए आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करके संगठन को दे चुके हैं, इसलिए उन्हें और कार्यसमिति का सदस्य होने के कारण कमलेश्वर पटेल को बुलाया गया। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ विदेश में हैं तो बाकी अपेक्षित नहीं थे।

वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर पूछे प्रश्न पर हरीश चौधरी ने जिस तरह से प्रतिक्रिया व्यक्त की, उसे लेकर भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने सवाल उठाते हुए कहा कि मीडिया के प्रश्न पर प्रदेश प्रभारी का तानाशाही भरा जवाब- ‘यह पूछने का अधिकार आपको नहीं है रहा। इसका आशय स्पष्ट है कि कांग्रेस सवालों से डरती है। उसे मीडिया की जवाबदेही स्वीकार नहीं। तो क्या इसे आंतरिक लोकतंत्र कहा जाए? कांग्रेस में लोकतंत्र केवल भाषणों तक सीमित है।

उपेक्षित हैं नेता-:
यह बात अलग है कि बैठक के लिए चुनिंदा नेता आमंत्रित थे लेकिन यह बात भी सही है कि पार्टी में कई नेता उपेक्षित हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के पास प्रदेश के भीतर कोई काम नहीं है। उन्हें संगठन सृजन के लिए अन्य प्रांतों में पर्यवेक्षक बनाकर भेजा जा रहा है। यही कारण है कि पूर्व नेता प्रतिपक्ष विधानसभा अजय सिंह हों या फिर डा. गोविंद सिंह, कांतिलाल भूरिया या फिर अन्य नेता, अपने-अपने क्षेत्र तक सीमित हो गए हैं।

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