करोड़ों की पानी टंकियां बनी शोपीस, अंचल में भीषण जल संकट से जनता त्रस्त
मनिकवार और देवरा फरेंदा में वर्षों से बंद पड़ी पानी टंकियों से जल आपूर्ति ठप, प्रशासन और शासन की अनदेखी पर ग्रामीणों में रोष

करोड़ों की पानी टंकियां बनी शोपीस, अंचल में भीषण जल संकट से जनता त्रस्त
मनिकवार और देवरा फरेंदा में वर्षों से बंद पड़ी पानी टंकियों से जल आपूर्ति ठप, प्रशासन और शासन की अनदेखी पर ग्रामीणों में रोष
📍 मनिकवार–देवरा फरेंदा | विंध्य दर्पण न्यूज़ 24
◼ करोड़ों की लागत, लेकिन एक बूंद पानी नहीं
मनिकवार एवं देवरा फरेंदा ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित पानी की टंकियां आज भी शोपीस बनकर खड़ी हैं। वर्षों पहले बनी इन टंकियों से आज तक ग्रामीणों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ, जिससे पूरे अंचल में भीषण जल संकट व्याप्त है।
◼ मुख्यमंत्री से जांच और कार्रवाई की मांग
अंतरराष्ट्रीय अधिवक्ता दिवस परिषद एवं सरपंच महा परिषद के अध्यक्ष ब्रह्मांशी पंडित राजकुमार सिंह तिवारी ने माननीय मुख्यमंत्री महोदय से मांग की है कि मनिकवार और देवरा फरेंदा में बनी पानी की टंकियों की तत्काल जांच कराई जाए और अविलंब जल आपूर्ति शुरू की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ये योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं।
◼ मनिकवार में पाइपलाइन तक नहीं बिछी
मनिकवार ग्राम पंचायत में गुणवत्ता विहीन तरीके से निर्मित करोड़ों रुपये की पानी टंकी में आज तक वाटर सप्लाई के लिए पाइपलाइन तक नहीं बिछाई गई है। शासन द्वारा भारी राशि खर्च किए जाने के बावजूद ग्रामीण पानी के लिए दूर-दूर भटकने को मजबूर हैं।
◼ देवरा फरेंदा में टंकी होने के बावजूद हाहाकार
देवरा फरेंदा ग्राम पंचायत में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी मौजूद है, लेकिन पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण जल आपूर्ति ठप पड़ी है। न तो कोई देखने वाला है और न ही मेंटेनेंस की व्यवस्था।
◼ स्कूल परिसर में नई टंकी पर सवाल
देवरा फरेंदा के हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में बिना पंचायत की अनुमति के नई पानी की टंकी का निर्माण किया जा रहा है। इससे स्कूल का खेल मैदान बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। भविष्य में छात्रों की खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और पढ़ाई पर इसका गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
◼ ‘जल ही जीवन है’, फिर भी अनदेखी
ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन का मूल आधार है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ और सुलभ पेयजल उपलब्ध कराना है, ताकि जलजनित बीमारियों को रोका जा सके। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
◼ उग्र आंदोलन की चेतावनी
भीषण जल संकट के कारण ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र जल आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो यह आक्रोश कभी भी उग्र जन आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।




