तीस दिनों का वादा बत्तीस दिन बीत गए स्थितियां और भयावह जिम्मेवार कौन? तो क्या अब जुमलो से चलेंगी मैहर की व्यवस्थाएं।
तो क्या अब जुमलो से चलेंगी मैहर की व्यवस्थाएं।

तीस दिनों का वादा बत्तीस दिन बीत गए स्थितियां और भयावह जिम्मेवार कौन? तो क्या अब जुमलो से चलेंगी मैहर की व्यवस्थाएं।
मैहर का व्यापारी अतिक्रमण की पीड़ा से कराह रहा था और आंदोलन की राह पर उतरने ही वाला था लेकिन मामले की गंभीरता को समझते हुए मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी ने व्यापारियों के साथ बैठक कर व्यापारियों को पूर्ण भरोसा देते हुए कहा था कि हम पंद्रह दिनों में रुई मंडी को एवं एक माह के अंदर शहर से अतिक्रमण को खत्म कर देंगे और इसके लिए उन्होंने बकायदे नगरपालिका की जिम्मेवार अधिकारी सीएमओ सहित संबंधित अधिकारियों को अतिशीघ्र मामले में कार्यवाही किए जाने के निर्देश जारी किए थे।
उनके इस आश्वासन का मैहर के व्यापारियों ने तहे दिल से स्वागत किया था साथ ही अभिनंदन किया था। लेकिन सीएमओ सुषमा मिश्रा की कार्यप्रणाली ने विधायक के भरोसे पर पलीता लगा दिया अतिक्रमण को लेकर आजतक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की बल्कि ऐसा एक्शन दिखाया कि ठेलो और अतिक्रमण की भरमार हो गई। जहां कही अतिक्रमण की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए वहां भी अतिक्रमण शुरू हो गया।
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मैहर शहर की सबसे संवेदन शील ओवर ब्रिज में ठेले लगने लगे वहां ऑटो स्टैंड बन गया गाड़िया खड़ी कर सवारी भरनी शुरू हो गई। पूरे फुटपाथ में सब्जी वाले कपड़ा वाले ठेला वालो ने कब्जा कर लिया। स्थितियां यह बताने लगी कि अतिक्रमण मुक्त मैहर की बाते जुमला लगने लगी। धार्मिक नगरी मैहर के आजतक के इतिहास में सुषमा मिश्रा जैसे सीएमओ नहीं मिले जिन्हें शहर की व्यवस्थाओं से कोई लेना देना नहीं उनका सिर्फ एक ही मकसद रामनाम की लुट है लुट सको तो लुट नहीं तो फिर पछताएगा जब 200 करोड़ का बजट जायेगा छूट।




